Silk Grass
पोषण, स्वास्थ्य एवं व्याधिप्रतिकार हेतु आहार एवं औषध के रूप में प्रयुक्त होने वाले सभी द्रव्यों की पहचान, गुण, कर्म एवं प्रयोग का जिस शास्त्र में विवेचन हो उसे द्रव्यगुणशास्त्र कहते हैं। द्रव्यगुणविज्ञान आयुर्वेद का मूल विषय है। इसे आयुर्वेद का 'मैटेरिया मेडिका' कह सकते हैं। इस विज्ञान में भेषजगुण विज्ञान (फर्माकोलॉजी), भेषज-अभिज्ञान (pharmacognosy) तथा पादपों के चिकित्सीय उपयोग शामिल है। 'द्रव्यगुण' दो शब्दों से मिलकर बना है - 'द्रव्य' (matter) तथा 'गुण' (properties)। द्रव्य के अन्तर्गत जीवित और निर्जीव दोनो वस्तुएँ आ जाती हैं। द्रव्यगुणशास्त्र का मुख्य अभिधेय-प्रतिपाद्य विषय द्रव्य, गुण तथा 'गुण' शब्द से संगृहीत रस, विपाक, वीर्य, प्रभाव एवं कर्म - ये साथ पदार्थ हैं। चरक का कहना है कि कुछ भी ऐसा नहीं है जो 'औषधि' न हो। चरक के अनुसार "जो द्रव्य में समवाय रूप से आश्रित हो, चेष्टा रहित हो, गुण रहित हो तथा कार्य के प्रति असमवायि कारण हो उसे गुण कहते हैं।" (समवायि तु निश्चेष्टः कारण गुणः) आयुर्वेद का मत है कि किसी औषधि का प्रभाव उसके…
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